आखिर जेल से बाहर आयीं इन्द्राणी

 

 

अपनी ही बेटी शीना बोरा के क़त्ल के आरोप में पिछले 16 महीने से जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी जेल से बाहर आयीं और अपने पिता के निधन के बाद होने वाले अंतिम संस्कार की रस्मों को पूरा किया। इंद्राणी के पिता उपेंद्र बोरा की 15 दिसंबर को मौत हो गई थी। जिसके बाद इंद्राणी ने अदालत से इजाज़त मांगी थी की वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहती हैं । अदालत ने  उन्हें 27 दिसंबर को सुबह 7 से शाम 7 बजे तक सिर्फ 12 घंटे की छूट दी थी। जिसके बाद वो भारी पुलिस सिक्युरिटी के बीच सुबह 7.30 पर भायखला जेल से बाहर आईं और मुलुंड स्थित ब्राह्मण सेवा समिति हॉल चली गईं। और तमाम रीती रिवाज पूरा को किया। इस दौरान उन्हें केवल मुंबई में अपने घर समेत कहीं भी जाने की परमिशन है। अदालत इंद्राणी ने उन्हें गुवाहाटी के घर जाने की इजाजत नहीं दी थी। फिलहाल, इंद्राणी मुंबई की भायखला जेल में हैं।

इंद्राणी के दरखास्त पर विशेष जज एचएस महाजन ने 22 दिसंबर को कहा था की , "इंद्राणी को भायखला जेल से सुबह बाहर लाया जाए और उन्हें पुलिस व्यवस्था के साथ ले जाया जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए की वो शाम 7 बजे वो वापस जेल में वापस आना होगा।" अदलात ने ये सख्त हिदायत दी थी की  "बाहर रहने के दौरान इंद्राणी को मीडिया से बात करने की परमिशन नहीं है।"

अपने पैतृक घर गुवाहाटी जाना चाहती थीं इंद्राणी

पिता के निधन के बाद इंद्राणी उनके अंतिम संस्कार की पूजा कराने असम जाना चाहती थीं, लेकिन सीबीआई अदालत में इसका विरोध किया था। अपने विरोध में  सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष इंद्राणी के भाई मिखाइल का ईमेल पेश किया था। जिसमे साफ़ कहा गया था की परिवार नहीं चाहता इंद्राणी गुवाहाटी आए। इतना ही नहीं सीबीआई ने ये भी कहा था, "इंद्राणी वहां जाकर विटनेस को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है। हो सकता है कि वे कस्टडी से भागने की भी कोशिश करे।"

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